यमुना नदी: धार्मिक महत्व, प्रदूषण और सफाई का समाधान

 यमुना नदी: धार्मिक महत्व, प्रदूषण और सफाई का समाधान

यमुना नदी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसे देवी के रूप में पूजा जाता है और यह सूर्य देव की पुत्री तथा यमराज की बहन मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यमुना स्नान और इसके जल का सेवन पापों का नाश करता है और मोक्ष प्रदान करता है। यमुना का विशेष संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है, जिन्होंने अपनी बाल लीलाएँ यमुना के तट पर की थीं। वृंदावन, मथुरा और गोकुल जैसे पवित्र स्थलों पर यमुना का धार्मिक महत्व सर्वोपरि है। कार्तिक पूर्णिमा और यम द्वितीया (भाई दूज) जैसे त्योहारों पर यमुना स्नान का विशेष महत्व है। यह केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है।

यमुना नदी का उद्गम हिमालय के यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है, जो उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यह लगभग 1,376 किलोमीटर लंबी है और भारत के सात राज्यों- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से होकर बहती है। इस नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ चंबल, बेतवा, केन, हिंडन, तोन्स और गिरी हैं।

हालांकि, आज यमुना नदी "भारत की सबसे प्रदूषित नदियों" में से एक बन चुकी है। दिल्ली में यमुना का 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित है। हर दिन लगभग 3,296 मिलियन लीटर घरेलू और औद्योगिक सीवेज बिना उपचार के नदी में गिरता है। कई जगहों पर ऑक्सीजन का स्तर शून्य तक पहुँच चुका है, और फॉस्फेट-नाइट्रेट जैसे रसायनों की मात्रा खतरनाक स्तर पर है। मुख्य कारणों में अनुपचारित सीवेज, जल प्रवाह की कमी और कृषि में उपयोग होने वाले रसायनों का बहाव शामिल हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यमुना की सफाई के लिए 2025 तक इसे नहाने लायक बनाने का वादा किया है। उन्होंने 6 प्रमुख ड्रेनों की सफाई, ट्रीटमेंट प्लांट लगाने और नदी में गिरने वाले अनुपचारित पानी को रोकने के लिए योजनाएँ बनाई थीं। साथ ही, यमुना के तटों का सौंदर्यीकरण भी प्रस्तावित है।

लेकिन अब तक इन वादों का ठोस परिणाम नहीं दिखा। योजनाओं के खराब कार्यान्वयन, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, जनसंख्या का दबाव और अत्यधिक औद्योगिक कचरे के कारण यमुना की स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा, प्राकृतिक जल प्रवाह की कमी भी एक बड़ा कारण है, क्योंकि नदी के पानी का उपयोग सिंचाई और बिजली उत्पादन में कर लिया जाता है।

यमुना को साफ करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। नदी में गिरने वाले गंदे पानी का पूरी तरह से उपचार होना चाहिए, और उद्योगों को ट्रीटमेंट प्लांट्स लगाने के लिए सख्ती से निर्देश दिए जाने चाहिए। बाँधों से पर्याप्त पानी छोड़कर नदी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखना होगा। साथ ही, जन जागरूकता फैलानी होगी ताकि लोग यमुना को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी समझें। सख्त कानून लागू कर प्रदूषण फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। जैविक खेती को बढ़ावा देकर कृषि से होने वाले रसायनों के बहाव को रोका जा सकता है।

यमुना केवल एक नदी नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान है। इसे स्वच्छ और संरक्षित करना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब तक सरकार और जनता एकजुट होकर ठोस प्रयास नहीं करेंगे, तब तक यमुना की सफाई एक अधूरा सपना बनी रहेगी।

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